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धार्मिक पर्व हमें जगाने आते हैं इसका लाभ लेकर पुण्य प्राप्त करें,, ,,,मुनि श्री विश्रुत सागर जी,,

अष्टान्हिका पर्व के समापन पर निकली श्री जिनेंद्र भगवान की विशाल रथयात्रा

धार्मिक पर्व हमें जगाने आते हैं इसका लाभ लेकर पुण्य प्राप्त करें,, ,,,मुनि श्री विश्रुत सागर जी,,

अष्टान्हिका पर्व के समापन पर निकली श्री जिनेंद्र भगवान की विशाल रथयात्रा

खंडवा। हमें अपने जीवन के कल्याण के लिए देव शास्त्र गुरु के प्रति समर्पण भाव रखना होगा। तभी हमारा जीवन सफल होगा। देव शास्त्र को मानने वाले ही सम्यक दृष्टि होते है। ज्ञान प्राप्त करने वाला ही ज्ञानी होता है। चातुर्मास हमारा और आपका होने जा रहा है अज्ञान को छोड़कर ज्ञान की बातें धारण करें। भटक रहे हैं तो जिनवाणी का ज्ञान धारण करें कोई भी पर्व हमें जगाने के लिए आता है, इन पर्वो के माध्यम से हम हमारे धर्म और संस्कृति को बनाएं रखते हैं। जैन धर्म में अष्टान्हिका पर्व एक महान पर्व है और इसके माध्यम से हम मंडल विधान की पूजा अर्चना करते हुए समस्त देवताओं को एकत्रित कर भक्ति भाव से अर्घ्य चढ़ाते हैं जो हमारे जीवन के लिए पुण्यशाली होते हैं। यह उद्गार चातुर्मास के लिए खंडवा पधारे उपाध्याय श्री विश्रुत सागर जी महाराज ने अष्टान्हिका पर्व के समापन अवसर पर श्री पोरवाड़ दिगम्बर जैन धर्मशाला में व्यक्त किए, मुनिश्री ने कहा कि जैन धर्म में पर्यूषण एवं अष्टान्हिका पर्व दो महान पर्व है। जब साधु-संत के साथ ही श्रावक भी तप, त्याग, तपस्या कर अपने जीवन का कल्याण करते हैं। हम हमारी युवा पीढ़ी को भी ऐसे पर्व और धर्म की संस्कृति से जोड़े रखे ताकि वे आधुनिकता की इस दौड़ में भटके नहीं। ज्ञान बिना कल्याण नहीं, अत: हमें परमात्मा ने जो मानव जीवन दिया है उसका हम सद्पयोग करें। मुनि श्री ने कहा कि यदि हम अंधकार में जिएंगे तो हमारा विकास और हमें पुण्य लाभ प्राप्त नहीं हो सकता उजाले में जीना सीखें, समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि गुरू पूर्णिमा के दिन 10 जुलाई गुरुवार को दोपहर 1.30 बजे अष्टान्हिका पर्व के समापन पर भगवान महावीर की विशाल रथयात्रा उपाध्याय श्री विश्रुत सागर एवं मुनि श्री निर्वेद सागर जी महाराज के सानिध्य में निकली, पर्व पर निकली इस रथयात्रा में भगवान महावीर विराजमान थे। जगह-जगह पर भक्तों ने श्रीजी की आरती उतारी। मुनि सेवा समिति के प्रचार मंत्री सुनील जैन ,प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि श्रीजी की रथयात्रा सराफा पोरवाड़ दिगम्बर जैन मंदिर से बुधवारा, केवलराम पेट्रोल पंप, बांबे बाजार, घंटाघर, टाउन हाल, मेडिकल चौराहा, खड़कपुरा, हरिगंज होते हुए सराफा पोरवाड़ दिगम्बर जैन धर्मशाला पहुंची जहां भगवान का अभिषेक व शांतिधारा एवं महाआरती के पश्चात अष्टान्हिका पर्व का समापन हुआ।निकली रथ यात्रा में श्रीजी के रथ को हाँकने का सौभाग्य श्रीमती राजकुमारी सुधांशु कुमार रूपांशु चौधरी परिवार को प्राप्त हुआ, बग्गी पर जिनवाणी लेकर बैठने का सौभाग्य टीकमचंद शरद कुमार बड़जात्या परिवार को प्राप्त हुआ।श्रीजी को रथ पर लेकर बैठने का सौभाग्य राहुल कुमार राज कुमार जैन अतर परिवार, स्वर्णकलश से श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य प्रवीण कुमार सेठी परिवार को प्राप्त हुआ।श्रीजी की माला पहनने का सौभाग्य राजकुमार घाटे परिवार को प्राप्त हुआ।श्रीजी के रथ में छड़ी लेकर खड़ने का सौभाग्य प्रतीक जैन,अंकित जैन सराफ परिवार को प्राप्त हुआ। सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने महाराज जी के दर्शन किये एवं गुरुपूर्णिमा के अवसर पर गुरवर के पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य प्राप्त किया।
रथयात्रा में महिलाएं केशरिया और पुरुष श्वेत वस्त्र पहनकर चल रहे थे। रथ यात्रा एवं प्रवचन में सांसद ज्ञानेश्वर पाटील, समाज अध्यक्ष वीरेंद्र जैैन, विजय सेठी,कैलाश पहाड़िया,संतोष बॉस,राजेन्द्र छाबड़ा ,प्रेमांशु चौधरी,सुनील जैन, विकास बड़जात्या, अशोक पाटनी ,निखलेश जैन, सुधांशु चौधरी,चौथमल जैन,डॉ राजीव जैन,डॉ इंद्रकुमार जैन,डॉ शरद जैन,नरेंद्र भट्यांण, राजमल जैन,गौरव जैन,अंकित जैन,सौरभ जैन,संदीप जैन,जवाहर जैन,प्रेम जैन,पुष्पेंद्र जैन,तरुण जैन,सहित सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे। रथ यात्रा में कांतिलाल जैन, संजय पंचोलिया द्वारा भजनों की प्रस्तुतियां दी गई। महिलाओं ने गरबा नृत्य किया। कार्यक्रम का संचालन पंकज जैन महल ने किया।

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